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Poetry

******आना इस बार ज़रूर होली पर************ 

By Navneet Bakshi / March 24, 2021

******आना इस बार ज़रूर होली पर************                                                                                                                             ( Picture from internet) सोचा करती थी मैं कि जब हम एक संग होंगे कितने सुन्दर तब होली के रंग होंगे   यूँ तो बरसाए हैं बहुतेरों ने रंग हर होली पर लेकिन कैसा कर दिया जादू तुमने दिल पर कि मुझे अब और कोई रंग नहीं भाता रंगे मेरे मन से…

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*************मेरी प्रेरणा************

By Navneet Bakshi / March 14, 2021

*************मेरी प्रेरणा************ मेरी कल्पना की परी तुम कि मेरी कल्पना के पर लुप्त हो जाती हो मुझ में ही कहीं तुम मेरी कविता को देकर स्वर प्रिय तुम उभरती हो दिल में फिर श्वासों में घुल-मिल जाती हो बनती हो तुम गीत मेरा फिर स्वयं ही उसको गाती हो मैं केवल माध्यम बन तुम्हारे अनूठे…

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यह आँसू मेरे, तुम्हारे

By Navneet Bakshi / March 2, 2021

यह आँसू मेरे, तुम्हारे कितना खुशनसीब हूँ मैं, तुम्हें यह बता नहीं सकता मैं तुम्हारी ज़िंदगी में लौट कर तो आ नहीं सकता लेकिन मैं उसे खूबसूरत बना सकता हूँ और यही मैं करना चाहता हूँ   इसलिये जाने-अनजाने परछाईं बन बगल में कभी और कभी एहसास बन तुम्हारे सिरहाने रात के अंधेरों में कभी…

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उंगली से शीशे पर लिखती हूँ नाम तुम्हारा

By Navneet Bakshi / February 28, 2021

  उंगली से शीशे पर लिखती हूँ नाम तुम्हारा और घबरा कर मिटा देती हूँ तुम क्या जानो मैं अपने दिल को तसल्ली किस किस तरह देती हूँ   एक तुम हो कि मेरा ख्याल भुलाए बैठे हो आँखों से दूर हो गए हो मगर दिल में समाये बैठे हो   चाहती हूँ मेरी गोदी…

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Intriguing Fibonacci series in nature around us!

By Suresh Rao / September 15, 2020

Definition (Rule) for the Fibonacci number series is: ANY NUMBER IN FIBONACCI NUMBER SERIES IS SUM OF 2 LOWER NUMBERS BEFORE IT. That is, an example of Fibonacci number series can be: 0 1 1 2 3 5 8 13 21 …. and so on. It follows the rule,  a random number such as 2…

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Jai Sriram

By Suresh Rao / September 12, 2020

Sri Ramji ballets are becoming popular in Bollywood. Watch one of them here.  https://www.facebook.com/zeemusiccompany/videos/373035020239109

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Memoir of a Gulmohar tree

By Yash Chhabra / September 8, 2020

The most awaited month has arrived May, the month of vibrant colors It brings a wave of crimson spread My branches shine in vibrant colors Dancing to the tune of a mild breeze The Garden looks deserted in the crowd The garden appears deserted to me No one to appreciate my blossom No one caresses,…

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रक्षाबंधन

By Alka Kansra / August 16, 2020

रक्षाबंधन बाल्कनी से देख रही थी बारिश की बूँदों की झड़ी बसंत गया, गर्मी गई और सावन भी आ गया संक्रमण से बेख़ौफ़ मौसम बदलते जा रहे त्योहार निकलते जा रहे होली गई , बैसाखी गई और आ गया रक्षाबंधन भीगे से मौसम में भीगी सी पलकों में तैर गई रेशम की डोरी कहाँ गया…

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Genetic Mashup

By Jeekay / August 14, 2020

01 14 August 2020 Genetic Mashup ******* Father’s nose and mother’s eyes, Father’s teeth and mother’s smile! Trace Y chromosomes or the X, All you get is a joint here and a break there, The new genetic mashup is here to stay.   Genetic reconstitution and again A mutation here or there It seems beyond…

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मुलाक़ात ख़ुद से

By Alka Kansra / July 29, 2020

This poem got the first position in a poetry competition conducted by Sukhan, a literary group. मुलाक़ात ख़ुद से चुपचाप बैठे बैठे आज यूँ ही खुल गई ज़िन्दगी की किताब और मैं पढ़ती चली गई एक के बाद एक पन्ना पलटती गई ज़िन्दगी की किताब आईना बन गई मुझे मेरा ही अक्स दिखलाती गई मुझ से मेरी ही मुलाक़ात करवाती गई क्या सोचती हूँ क्या चाहती हूँ चुपके से कान में बतलाती चली गई Alka Kansra

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