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Charumati Ramdas

सिर्योझा – 5

By Charumati Ramdas / December 24, 2020

लेखिका: वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास साइकल ख़रीदी गई   और इसी कंधे पर बैठकर वह इतवार को दुकान में गया – साइकल ख़रीदने. इतवार अचानक ही आ गया, उम्मीद से भी पहले, और सिर्योझा बेहद उत्तेजित हो गया, यह जानकर कि वह आ गया है. “तुम भूले तो नहीं?” उसने करस्तिल्योव  से पूछा.…

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सिर्योझा – 4

By Charumati Ramdas / December 19, 2020

लेखिका: वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास   करस्तिल्योव  के साथ पहली सुबह – नास्त्या दादी के यहाँ   आँगन में लोहे के खड़खड़ाने की आवाज़ आई. सिर्योझा ने फ़ाटक से भीतर देखा: करस्तिल्योव  बोल्ट निकाल कर खिड़कियाँ खोल रहा था. उसने धारियों वाली कमीज़ पहनी थी, नीली टाई बांधी थी, गीले बाल खूब अच्छे…

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कड़ाके की ठण्ड

By Charumati Ramdas / December 16, 2020

  लेखक: ईल्या इल्फ़, यिव्गेनी पित्रोव अनुवाद : आ. चारुमति रामदास स्केटिंग रिंक्स बन्द हैं. बच्चों को घूमने के लिए नहीं छोड़ा जा रहा है, और वे घर में बैठे-बैठे उकता रहे हैं. घुड़सवारी प्रतियोगिताएँ रोक दी गई हैं. तथाकथित “कुत्ती-ठण्ड” आ गई है. मॉस्को में कुछ थर्मामीटर -340 दिखा रहे हैं, कुछ, न जाने…

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सिर्योझा – 3

By Charumati Ramdas / December 15, 2020

लेखिका: वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास घर में परिवर्तन   “ सिर्योझेंका,” मम्मा ने कहा, “जानते हो, …मैं चाहती हूँ कि हमारे पास पापा होते.” सिर्योझा ने आँखें उठाकर उसकी ओर देखा. उसने इस बारे में सोचा ही नहीं था. कुछ बच्चों के पापा होते हैं, कुछ के नहीं. सिर्योझा के भी नहीं हैं…

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सिर्योझा – 2

By Charumati Ramdas / December 13, 2020

लेखक: वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास     ज़िन्दगी की मुश्किलें   ये उसने अच्छा किया जो पूछ लिया. वर्ना क्या हर चीज़ पे ध्यान दे सकते हो? सिर्योझा को अच्छा ही लगता, मगर ध्यान ही तो बस नहीं होता ना. चारों ओर इतनी सारी चीज़ें हैं. दुनिया ठसाठस भरी है चीज़ों से. दीजिए…

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सिर्योझा – 1

By Charumati Ramdas / December 11, 2020

  कौन है ये सिर्योझा और वह कहाँ रहता है? लेखिका: वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास कहते हैं कि वह लड़की जैसा है. ये तो सरासर मज़ाक हुआ! लड़कियाँ तो फ्रॉक पहनती हैं, मगर सिर्योझा ने तो कब का फ्रॉक पहनना छोड़ दिया है. क्या लड़कियों के पास गुलेल होती है? मगर सिर्योझा के…

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The Eternal Bride : Tribute to the Beloved

By Charumati Ramdas / December 2, 2020

    Chingiz Aitmatov’s  Tribute to the Beloved : The Eternal Bride A. Charumati Ramdas   Though in Chingiz Aitmatov’s works the main protagonist is generally a man, women too occupy a significant place. Mostly being on the periphery of the plot they act as someone who provides a twist to the fate of the male…

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देसी दारू का तालाब

By Charumati Ramdas / October 22, 2020

    देसी दारू का तालाब लेखक: मिखाइल बुल्गाकव अनु.: ए.चारुमति रामदास ईस्टर संडे की रात को दस बजे हमारा नासपीटा कॉरीडोर ख़ामोश हो गया. इस सुकूनभरी ख़ामोशी में मेरे मन में एक विकट ख़याल कौंध गया कि मेरी ख़्वाहिश पूरी हो गई है और बुढ़िया पाव्लव्ना, जो सिगरेट बेचा करती थी, मर गई है.…

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Bulgakov’s Letters to Stalin

By Charumati Ramdas / October 16, 2020

The Two Letters that Made the Difference                                                                                                                                                                     -A.Charumati Ramdas   M.A. Bulgakov (1891-1940), having completed Medicine at the University of Kiev in 1916, started writing in 1919. The first short story was written in the light of a kerosene lamp in a running train and it was published in a small newspaper of a…

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Cassandra Mark

By Charumati Ramdas / October 11, 2020

Chingiz Aitmatov’s Cassandra’s Mark   A.Charumati Ramdas   Chingiz Torekulevich Aitmatov, author of Cassandra’s Mark was special in so many ways. Ever since he started writing, he always tried to give something new in each of his works. The beginning was made in the late 50’s with short stories (Stories of Mountains and Steppes); in 60’s appeared his…

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