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Charumati Ramdas

सिर्योझा – 14

By Charumati Ramdas / March 1, 2021

लेखिका : वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास   बेचैनी   फिर से बीमारी!  इस बार तो बिना किसी कारण के टॉन्सिल्स हो गए. फिर डॉक्टर ने कहा, “छोटी छोटी गिल्टियाँ,” और उसे सताने के नए तरीके ढूँढ़ निकाले – कॉडलिवर ऑईल और कम्प्रेस. और बुखार नापने के लिए भी कहा. कम्प्रेस में क्या करते…

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Mystery of The Missing Mom

By Charumati Ramdas / February 24, 2021

A.Charumati Ramdas The child was not crying, but there was bewilderment on his face. A smart elderly lady was taking care of him. Another boy, with exactly similar features, but with a sober and serious expression on his face was seated on the chair next to him. A middle aged person, again with the same…

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सिर्योझा – 13

By Charumati Ramdas / February 23, 2021

लेखिका: वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास अध्याय 13   समझ से परे   आख़िर सिर्योझा को बिस्तर से उठने की इजाज़त मिल गई, और फिर घूमने फिरने की भी. मगर घर से दूर जाने की और पड़ोसियों के घर जाने की इजाज़त नहीं थी : डरते हैं कि कहीं फिर उसके साथ कुछ और…

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सिर्योझा – 12

By Charumati Ramdas / February 17, 2021

लेखिका: वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास वास्का के मामा से पहचान होने के परिणाम   कालीनिन और दाल्न्याया रास्तों के बीच ख़ुफ़िया संबंध बन रहे हैं. चर्चाएँ हो रही हैं. शूरिक यहाँ-वहाँ जाता है, भागदौड़ करता है और सिर्योझा को ख़बर देता है. ख़यालों में डूबा, अपने साँवले, माँसल पैरों से वह उतावलेपन से…

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सिर्योझा – 11

By Charumati Ramdas / February 9, 2021

लेखिका: वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास   वास्का और उसके मामा   वास्का के एक मामा हैं. लीदा ज़रूर कहती कि यह सब झूठ है, कोई मामा-वामा नहीं है, मगर उसे अपना मुँह बन्द रखना पड़ेगा : मामा हैं; ये है उनकी फोटो – शेल्फ पर, लाल बुरादे से भरे दो गुलदस्तों के बीच…

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सिर्योझा – 10

By Charumati Ramdas / February 4, 2021

लेखिका: वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास   आसमान में और धरती पर हो रही घटनाएँ   गर्मियों में तारे नहीं दिखाई देते. सिर्योझा चाहे कभी भी उठे, कभी भी सोए – आँगन में हमेशा उजाला ही रहता है. अगर बादल और बारिश भी हो, तब भी उजाला ही रहता है, क्योंकि बादलों के पीछे…

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सिर्योझा – 9

By Charumati Ramdas / January 30, 2021

लेखिका: वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास करस्तिल्योव  की हुकूमत   उन्होंने एक गढ़ा खोदा, उसमें खंभा लगाया, लंबा तार खींचा. तार सिर्योझा के आंगन में मुड़ता है और घर की दीवार में चला जाता है. डाईनिंग रूम में छोटी सी मेज़ पर, सिग्नल पोस्ट की बगल में काला टेलिफ़ोन रखा है. ‘दाल्न्याया’ रास्ते पर…

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सिर्योझा – 8

By Charumati Ramdas / January 22, 2021

लेखिका: वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास   परदादी का दफ़न परदादी बीमार हो गई, उसे अस्पताल ले गए. दो दिन तक सब कहते रहे कि जाकर उसे देखना चाहिए, और तीसरे दिन जब घर में सिर्फ सिर्योझा और पाशा बुआ थे, नास्त्या दादी आ गई. वह हमेशा से भी ज़्यादा तनी हुई और गंभीर…

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सिर्योझा – 7

By Charumati Ramdas / January 2, 2021

लेखिका: वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास झेन्का   झेन्का – अनाथ है, अपनी मौसी और बहन के साथ रहता है. बहन – उसकी सगी बहन नहीं है – मौसी की बेटी है. दिन में वह काम पर जाती है, और शाम को इस्त्री करती है. वह अपने ड्रेस इस्त्री करती है. आँगन में बड़ी…

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सिर्योझा – 6

By Charumati Ramdas / December 27, 2020

लेखिका: वेरा पनोवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास   करस्तिल्योव  और बाकी लोगों में क्या फ़र्क है   बड़े लोगों के पास कितने फ़ालतू शब्द होते हैं ! मिसाल के तौर पर, यही देखिए: सिर्योझा चाय पी रहा था और उसने चाय गिरा दी; पाशा बुआ कहती है: “कैसा फ़ूहड़ है! तेरे रहते तो घर में…

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