Sign Up    /    Login

वड़वानल – 35

लेखक: राजगुरू द. आगरकर

अनुवाद: आ. चारुमति रामदास

 

 

‘‘हमें तुम्हारी कोरी सहानुभूति की जरूरत नहीं है,’’ गुरु ‘नर्मदा’ से मिलने आए सैनिकों से कह रहा था । ‘‘हमें ऐसी भलमनसाहत की जरूरत नहीं है कि किसी को तो हमारी कठिनाइयों   के   बारे   में,   हमारे   साथ   किये   जा   रहे   बर्ताव   के   बारे में    आवाज    उठानी    चाहिए    थी,    चलो    हम    ही    यह    कर    देते    हैं ।’’

‘‘अरे,  ये  हमारी  कोरी  सहानुभूति  नहीं  है ।’’  ‘नर्मदा’  के  असलम  खान  ने कहा । ‘‘शायद तुम्हें मालूम नहीं है । ‘नर्मदा’ के हम कुछ सैनिक नारे लिखते हैं, पोस्टर्स चिपकाते हैं; मगर जैसे ही उन्हें पता चलता है – नारे मिटा दिए जाते हैं, पोस्टर्स   फाड़   दिए   जाते   हैं । वहाँ के अफ़सर गुस्सा ही नहीं होते । जो कुछ भी तुम लोग    कर    रहे    हो,    उसमें    हम    पूरी    तरह    तुम्हारे    साथ    हैं ।’’

‘‘हमें  तुम  सभी  का  साथ  चाहिए  और  उसी  विश्वास  के  बलबूते  पर  ही  हम अंग्रेज़ों के खिलाफ ताल ठोकते हुए खड़े रहने की कोशिश कर रहे हैं । यदि सारे नौदल भी अंग्रेज़ों के खिलाफ खड़े हो जाएँ तो अंग्रेज़ पलभर भी यहाँ ठहर नहीं पाएँगे । मुट्ठी भर लोगों का विद्रोह वे  आसानी से दबा देंगे । इसलिए हमें तुम सबका साथ    चाहिए, ’’    गुरु    ने    कहा ।

‘‘अंग्रेज़  अधिकारी  हमसे  भी  बड़ी  मगरूरी  से  पेश  आते  हैं ।  हमेशा  गालियाँ देते हैं, अपमान करते हैं । हमें भी तुम लोगों की तरह रिक्वेस्ट्स करनी हैं, मगर पहले  यह  देखने  वाले  हैं  कि  तुम  लोगों  की  रिक्वेस्ट्स  का  क्या  हश्र  होता  है ।’’

असलम    ने    जानकारी    दी ।

मदन ‘पंजाब’ के सैनिकों से मिलने पहुँचा । वह सीधे इलेक्ट्रिशियन ब्रान्च की मेस में पहुँचा । मुल्ला सामने ही बैठा    था ।

‘‘दबिर कैसा है?’’  मदन    के    इस    प्रश्न    को    सुनते    ही    मेस    में    उपस्थित    पाँच–छह लोग    मदन    के    पास    आए ।

‘‘अभी  सेल  में  है ।  अभी  कैप्टेन  के  सामने  पेश  होना  बाकी  है,  मगर  निर्णय हो   चुका   है ।   दो–चार   महीनों   का   सश्रम   कारावास   और   नौसेना   से   निष्कासन ।’’

मुल्ला की आवाज़ में निराशा थी ।

‘‘एक–दो   लोगों   को   नौसेना   से   निकाल   देने   से   समस्या   हल   नहीं   होगी,   बल्कि और    बढ़ती जाएगी ।’’    मदन    का    अनुमान    था ।

‘‘तुम ठीक कह रहे हो । आज हममें से हर कोई बेचैन है । उनके मन में एक ही सवाल उठ रहा है: क्या हम गुलाम हैं, या बेगार हैं ?’’ मुल्ला के शब्दों से चिढ़ प्रकट हो रही थी । ‘‘हमारे यहाँ हर सैनिक सरकार का विरोध करने के लिए तैयार   है ।   ज्यादा   से   ज्यादा   क्या   करेंगे ?   विद्रोही   कहकर   गोलियों   से   भून देंगे ? भूनने दो गोलियों से! इस लाचार ज़िन्दगी से तो सम्मान की मौत अच्छी है । जन्म लेकर मातृभूमि की स्वतन्त्रता    के    लिए    कुछ    कर    गुजरने    की    तसल्ली    तो मिलेगी ।’’

‘‘अरे,   खाने–पीने   की   चीजों   की   यदि   कमी   है   तो   इसमें   हमारा   क्या   दोष है ?  तुम  राज  कर  रहे  हो  तो  बाँटो  दाना–पानी!  मँगाओ  विदेशों  से,’’  पास  ही  बैठा महेन्द्रनाथ बोला,    ‘‘इन गोरे अधिकारियों और सैनिकों के राशन में तो कोई कटौती नहीं  है,  कटौती  है  तो  सिर्फ  हम  हिन्दुस्तानी  सैनिकों  के  राशन  में ।  खाना  पूरा  देते नहीं,  उससे  ठीक  से  पेट  भी  नहीं  भरता,  और  यदि  इस  बात  की  शिकायत  करो तो   जवाब   मिलता   है,   ऑपरेशन   करवा   के   अपनी   आँत   छोटी   करवा   लो   जिससे पेट भर जाएगा ।’’    महेन्द्रनाथ तिलमिलाकर बोल रहा था ।

‘‘तुम्हारे गुस्से को मैं समझ रहा हूँ । हमें इसके विरुद्ध खड़ा होना ही चाहिए । हम ‘तलवार’  के  सैनिक  तुम्हारे  साथ  हैं ।  हम  अगर  एकजुट  होकर  इस  सरकार का    विरोध    करेंगे    तभी    कुछ    फायदा    होगा ।    मुट्ठीभर    लोगों    का    विद्रोह    सरकार    फौरन दबा   देगी,’’   मदन   ने   कहा ।   ‘‘कल   हम   सभी   जहाजों   के   सभी   क्रोधित   सैनिकों की  मीटिंग  आयोजित  कर  रहे  हंै ।  वहाँ  इन  विभिन्न  घटनाओं  पर  विचार  करके अगला   कार्यक्रम   निश्चित   होगा ।   समय   और   स्थान   के   बारे   में   हम   कल   सूचना देंगे ।’’

‘‘हम    इस    मीटिंग    में    जरूर    आएँगे,’’    मुल्ला    ने    वादा    किया ।

 

 

 

 

शनिवार   रात   को   मदन,   गुरु,   खान,   दास   एवं   अन्य   आज़ाद   हिन्दुस्तानी   सैनिक हमेशा    के    संकेत    स्थल    पर    इकट्ठा    हुए    थे ।    विभिन्न    जहाज़ों    पर    होकर    आए    सैनिकों ने   अपने   अनुभवों   के   बारे   में   बताया,   अपनी   राय   दी ।   गुरु   ने   उससे   मिलने   के लिए    आये    हुए    सैनिकों    के    बारे    में    अपनी    राय    दी ।

‘‘इन  अलग–अलग  अनुभवों  के  बारे  में  सुनने  के  बाद  मुझे  ऐसा  लग  रहा है   कि   वातावरण   खूब तप   रहा   है ।   यदि   हम   एकजुट   हो   गए   तो   विद्रोह   सफ़ल होगा ।  हम  सबको  संगठित होना  होगा ।  मैं  यह  सुझाव  देता  हूँ  कि  अलग–अलग जहाजों  के  प्रतिनिधियों  की  कल  एक  मीटिंग  बुलाई  जाए ।’’  खान  की  इस  राय से सब    सहमत    हो    गए ।

 

 

 

सुबह      के      आठ      बजे      थे ।      फोरनून–वॉच      वाले      सैनिक      कम्युनिकेशन      सेंटर      में      अपनी–अपनी ड्यूटी    पर    आ    चुके    थे ।

”Any thing Pending, George?” खान ने  मॉर्निंग–वॉच के क्रिप्टो लीडिंग से चार्ज लेते हुए पूछा ।

”You, bloody Indian, address me as leading signalman George, and not just George. I am not your domestic servant, understand?” जॉर्ज    गुर्राया ।

खान  को  जॉर्ज  पर  गुस्सा  आ  गया ।  वह  और  जॉर्ज  करीब–करीब  एक  ही उम्र के थे,   उनकी   रैंक्स   भी   एक   ही   थी – लीडिंग   सिग्नलमैन   खान   जॉर्ज   से   दो–चार महीने   सीनियर   ही   था ।   मगर   गोरे   जॉर्ज   को   इस   सबसे   कुछ   लेना–देना   ही   नहीं था । उसे बस एक ही बात मालूम थी – वह    शासक    वर्ग    का    है ।

खान     ने     अपने     गुस्से     को     रोकते     हुए     फिर     से     हँसकर     पूछा,    ”Leading signalman, George, is there anything pending?”

”That’s better,” जॉर्ज खुश हो गया । ‘‘डेढ़ सौ ग्रुप का एक typex message decode करना है । मैंने  handing  over में दर्ज कर दिया है,’’ और जवाब    की    राह    न    देखते    हुए    जॉर्ज    निकल    गया ।

खान  ने  पहले  छोटे–छोटे  रूटीन  मेसेज  डीकोड  किये ।  बाहर  भेजे  जाने  वाले मेसेज  अनकोड  करके  रूट  कर  दिये ।  दस  बज  गए  थे ।  ट्रैफिक  कम  हो  गया  था ।

‘‘खान,    तू  जाने    से    पहले    वह    बड़ा    मेसेज    डीकोड    करके    देना ।’’    ड्यूटी    योमन स्मिथ बाहर से ही चिल्लाया ।

”Yes, Yeo I shall.” खान   ने   जवाब   दिया   और   वह   उस   मेसेज   को   डीकोड करने    लगा ।

उसने  टाइपेक्स  मशीन  को  सेट  किया  और  उस  मेसेज  के  ग्रुप्स  टाइप  करने लगा ।   दस   ग्रुप्स   टाइप   करने   के   बाद   उसने   मेसेज   देखा ।   पहले   दो   अक्षर   थे ।   आर.एम.    खान समझ गया कि मेसेज रोमन-मलयालम में है,   मतलब आज़ाद हिन्दुस्तानी का है । उसने नायर को बुलाया ।

‘‘मैं  मेसेज  डीकोड  करता  हूँ ।  तू  झट  से  उसका  तर्जुमा  करके  लिख  ले ।’’

पन्द्रह–बीस    मिनट    में    मेसेज    डीकोड    हो    गया ।

‘‘योमन  स्मिथ,  मेसेज  करप्ट  है ।  पाँच–छह  बार  कोशिश  की  मगर  सब  कुछ लैटिन–ग्रीक    ही    आ    रहा    है ।’’

योमन  स्मिथ  क्रिप्टो  ऑफिस  में  आया ।  उसने  डिक्रिप्ट  किया  हुआ  मेसेज देखा ।   उसकी   समझ में   कुछ   भी   नहीं   आया ।   उसने   टाइपेक्स   मशीन   की   जाँच की और पन्द्रह–बीस मिनट बाद खान से कहा, ”All right, send a message to Hugli that your 091545 is undecipherable.”

‘‘आल   राइट,   योमन ।’’   खान   ने   चिल्लाकर   जवाब   दिया   और Hugli के लिए    मेसेज    तैयार    कर    दिया ।

नायर  के  लिखे  हुए  सन्देश  को  उसने  दो–चार  बार  एकाग्रता  से  पढ़ा  और काग़ज    के    बारीक–बारीक    टुकड़े    करके    डस्टबिन    में    डाल    दिये ।

”What is this, Khan?” नायर   ने   पूछा ।

‘‘अरे कोई भी सुबूत पीछे नहीं छोड़ना चाहिए । मेसेज तीन–चार बार पढ़ा तो  याद  हो  गया ।  अब  उस  काग़ज  की  क्या  जरूरत ?’’  खान  ने  हँसते  हुए  जवाब दिया ।

‘‘हुगली    के    सैनिक    बिफर    गए    हैं ।’’    खान    उस    रात    को    आज़ाद हिन्दुस्तानियों को  बता  रहा  था ।  ‘‘ख़राब  खाने  के  बारे  में  एबल  सीमन  राजपाल  ने  ऑफिसर ऑफ   दि   डे   से   शिकायत   की ।   शिकायत   सुनकर   कार्रवाई   करने   के   बदले   उसने राजपाल   को   ही   डाँटा   और   उसे   गालियाँ   दीं ।   गरम   दिमाग   वाले   राजपाल   से ये गाली–गलौज  बर्दाश्त  नहीं  हुई  और  वह  ऑफिसर  ऑफ  दि  डे  से  हाथापाई  करने लगा ।   नतीजा   वही   हुआ   जो   होना   चाहिए ।   उसे   कैप्टेन   के   सामने   खड़ा   किया   गया और सज़ा सुना दी गई ।’’

‘‘इसमें खास बात क्या है?    वह तो होनी ही थी!’’   मदन ने कहा ।

‘‘राजपाल   ने   सजा   तो   मंजूर   कर   ली,   मगर उसने यह माँग की कि उसे दी जाने वाली शारीरिक सज़ा सिविलियन्स के सामने न दी जाए,’’ खान समझा रहा   था,   ‘‘तुम्हें   मालूम   है,   हुगली   के   परेड   ग्राउण्ड   के   पास   फैमिली   क्वार्टर्स   हैं । वहाँ   रहने   वालों   को   परेड   ग्राउण्ड   के   पास   से   ही   आना–जाना पड़ता है । दोपहर  को  चार  बजे  से  छह  बजे  तक  जब  राजपाल  शारीरिक  शिक्षा  भुगत  रहा था  तो  सैनिकों  के  परिवार  वाले  देखते  और  राजपाल  को  यह  अपमानजनक  प्रतीत हो  रहा  था ।  इसलिए  उसने  प्रार्थना  की  कि  इस  सजा  की  जगह  बदल  दी  जाए, मगर   उसे   खारिज   कर   दिया   गया ।   उसे   सख्ती   से   परेड   ग्राउण्ड   पर   लाया   गया और फ्रॉग–जम्प का,    क्रॉलिंग    का    और    डबल    मार्च    का    हुक्म    दिया    गया ।    मगर उसने   एक   भी   ऑर्डर   का   पालन   नहीं   किया ।   तब   गोरे   सैनिकों   ने   उसे   बेहोश   होकर ज़मीन पर गिर जाने तक मारा ।’’

खान    के    स्पष्टीकरण    से    सभी    सन्न    हो    गए ।

‘‘हुगली   के   सारे   सैनिक   चिढ़   गए   हैं ।   उन्होंने   माँग   की   थी   कि   राजपाल के   साथ   मारपीट   करने   वाले   नेवल–पुलिस   को   सज़ा दी जाए,   मगर उनकी माँग ठुकरा दी गई । उन्होंने हमसे मदद और हमारी राय माँगी    है ।’’

‘‘हम यहाँ से उनकी कैसी और किस तरह से मदद कर सकते हैं ?’’ गुरु ने   पूछा ।

‘‘हम   तुम्हारे   साथ   हैं,   ये   कहना   ही   उनके   लिए   सबसे   बड़ी   मदद   होगी । उन्हें यह बात जान लेनी चाहिए कि वे अकेले नहीं हैं ।’’ मदन ने सुझाव दिया ।

‘‘उन्हें दत्त की गिरफ्तारी के बारे में भी पता चल ही गया होगा और इसीलिए हमारी ओर से क्या कार्रवाई होगी इस दृष्टि से हमारी सलाह पूछी होगी । हमारी कार्रवाई उनकी कार्रवाई की पूरक होनी चाहिए ।’’    गुरु    ने    कहा ।

‘‘सिर्फ   ‘तलवार’   के   ही   सैनिक   बेचैन   नहीं   हैं,   बल्कि   पूरे   देश   के   सैनिक गुस्से  में  हैं । अब  हमें  इस  बात  पर  विचार  करना  चाहिए  कि  हमारी  कार्रवाईयों में एकसूत्रता किस प्रकार लाई जाए । यदि हम   एकजुट   हो   गए,   सबने   एकदम पूरे   देशभर   में   बग़ावत कर   दी   तो   अंग्रेज़ों   को   छिपने   के   लिए   जगह   भी   नहीं   मिलेगी और  उन्हें  फ़ौरन  देश  छोड़ना  पड़ेगा ।’’  जी.  सिंह  ने फ़ौरन कार्रवाई करने  पर  ज़ोर दिया ।

‘‘मगर  हमने  अभी  यह  कहाँ  तय  किया  है  कि  कार्रवाई  अथवा  विद्रोह  कब करना है ?   ये कब तय करने वाले हैं?’’    दास    ने    पूछा ।

‘‘मेरा   ख़याल है कि परिस्थिति की मार से यह सब अपने आप हो जाएगा । इस   प्रकार   की   स्वयंप्रेरित   कार्रवाई   ही   सफल   होगी,   क्योंकि   वह   पूरे   दिल   से  हो रही   होगी । हमें परिस्थिति की कठोरता को बढ़ाने का काम करना चाहिए ।’’   खान ने   स्पष्ट   किया ।

‘‘फिर    हुगली    के    सैनिकों    से    क्या    कहना    चाहिए ?’’    गुरु    ने    पूछा ।

‘‘मेरा  ख़याल  है  कि  ‘हम  तुम्हारे  पीछे  हैं ।  कार्रवाई  के  लिए  हमारे  सन्देश की  प्रतीक्षा  करो’  इतना  ही  कहा  जाए ।’’  मदन  ने  सुझाव  दिया  जो  सबको  पसन्द आ  गया ।  सुबह  चार  से  आठ  वाली  ड्यूटी  के  दौरान  इस  सन्देश  को  भेजने  की ज़िम्मेदारी भी मदन ने ही स्वयं पर ले ली ।

 

 

Courtesy: storymirror.com

Share with:


0 0 votes
Article Rating

Charumati Ramdas

I am a retired Associate Prof of Russian. I stay in Hyderabad. Currently keep myself busy with translations of Russian works into HIndi.
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

Recent Comments

Random Posts

Placeholder Image 90

Thewriterfriends.com is an experiment to bring the creative people together on one platform. It is a free platform for creativity. While there are hundreds, perhaps thousands of platforms that provide space for expression around the world, the feeling of being a part of fraternity is often lacking. If you have a creative urge, then this is the right place for you. You are welcome here to be one of us.

Random Posts

Covid Dryrun Glitches at Bengaluru

By Suresh Rao | January 8, 2021 | 1 Comment

EXCERPTS from Suraksha P, DHNS, Bengaluru, Jan 08 2021, 22:01 ist updated: Jan 09 2021, 03:12 ist The very objective of Covid-19 vaccination drive run is to give health workers an experience of Covid Vaccine Intelligence Network (Co-WIN) platform – uploading details of beneficiaries, session sites and to identify the challenges thereon. But the exercise…

Share with:


Read More

Kannada actress Ragini arrested on drug charges

By Suresh Rao | September 6, 2020 | 2 Comments

  RAGINI DWIVEDI is originally from Gujarat. She  learned Kannada and started acting in Kannada films. She is also a item dancer. Her home in Bengaluru was raided last week by sleuths of Central Crime Branch (CCB). Allegedly, banned narcotic substances were found in her home.   (pic) Arrested Ragini on her way to the…

Share with:


Read More

वड़वानल – 46

By Charumati Ramdas | August 18, 2020 | 0 Comments

लेखक: राजगुरू द. आगरकर अनुवाद: आ. चारुमति रामदास     ‘‘अरे ताऊ, देख क्या लिखा है!’’   एक सायंकालीन समाचार–पत्र नचाते हुए सज्जन सिंह अपने हरियाणवी ढंग में रामपाल से कह रहा था । ‘‘क्या लिखा है?’’    रामपाल ने पूछा । ‘‘अरे, ‘तलवार’  के  सैनिकों ने अंग्रेज़ों के खिलाफ विद्रोह कर दिया है,’’ सज्जन    सिंह    ने   …

Share with:


Read More

Best Full

By Rcay | July 8, 2020 | 4 Comments

A hundred word short story.  Sharing mine. You also try!                                                                                          …

Share with:


Read More

Audrey Hepburn Remembered

By Suresh Rao | September 15, 2020 | 5 Comments

Audrey got her first Oscar (for best Actor, 1954) in ‘Roman Holiday’ beating Gregory Peck her co-star  in the same movie. Audrey Hepburn Life Story…  https://www.facebook.com/watch/?v=22692663474642 ================================================================= Enjoy 1954 Movie, Roman Holiday starring Gregory Peck and Audrey Hepburn at link below: https://www.dailymotion.com/video/x3rp5md —————————————————————————————————————- Share with: 5 1 vote Article Rating

Share with:


Read More

Indian American, Dr Vivek Murthy, likely to head Biden’s Corona Task force in USA

By Suresh Rao | November 10, 2020 | 2 Comments

(photo) Vivek Murthy, MD (Source: PTI, Washington, Nov 08 2020, 11:37 IST updated: Nov 08 2020, 11:38 IST.) Physician of Indian-American/British origin, Dr Vivek Murthy is expected to co-chair the coronavirus task force which President-elect Joe Biden is likely to announce on Monday.  Dr Murthy, 43, originally hails from Karnataka; he was appointed America’s 19th…

Share with:


Read More

Living At Constance Lodge—-Part 5

By Navneet Bakshi | September 20, 2021 | 1 Comment

She used to be in the kitchen and the aroma of preparations for the breakfast wafting through the air aroused my hunger. She had a lot of work to do in the morning as four of her children and a short-tempered husband had to be served the breakfast and all of them had to be…

Share with:


Read More

DRAWSTRING DRAMA

By Navneet Bakshi | July 31, 2020 | 4 Comments

DRAWSTRING DRAMA ( From Memories of My Childhood) We had a long sunny verandah. There was only one entrance to the house and that was at an extreme end of the verandah. There was our bathroom to the right hand side as you entered and two closed doors of the adjoining apartment which mostly remained…

Share with:


Read More

Surprised that educated people fall prey to financial fraudsters!

By Suresh Rao | January 4, 2021 | 4 Comments

Representative Image. Most victims of VFSSL fraud were senior citizens of Bangalore & Chennai In yet another case of suspected financial fraud in Bengaluru, several people have registered complaints against Chennai-headquartered Vishwapriya Financial Services Securities Limited (VFSSL), alleging that it has cheated them of lakhs of rupees. Four FIRs have been registered at Siddapura and…

Share with:


Read More

वड़वानल – 62

By Charumati Ramdas | August 31, 2020 | 0 Comments

लेखक: राजगुरू द. आगरकर अनुवाद: आ. चारुमति रामदास   जहाज़ों पर गहमागहमी बढ़ गई थी। सभी जहाज़ किसी भी क्षण बाहर निकलने की और तोपें दागने की तैयारी कर रहे थे। बॉयलर फ्लैशअप किए जा रहे थे, चिमनियाँ काला धुआँ फेंक रही थीं। फॉक्सल और क्वार्टर डेक की ऑनिंग निकाली जा रही थी,  तोपों से…

Share with:


Read More
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x