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मैं अपना प्यार…३

लेखक: धीराविट नात्थगार्न

अनुवाद: आ. चारुमति रामदास

 

*Cum ames non sepias aut cum sepias non ames (Latin): जब तुम प्‍यार करते हो तो सोच नहीं सकते, और जब तुम सोचते हो तो तुम प्‍यार नहीं कर सकते। प्‍यूबिलियस साइरस (fl.1st Century BC)

तीसरा दिन

जनवरी १३,१९८२

तुम्‍हारे बगैर जिन्‍दगी जीने लायक ही नहीं है। तुम वहाँ थाईलैण्‍ड में क्‍या कर रही हो? मेरा दिमाग इतना भरा हुआ है कि मैं किसी भी चीज पर ध्‍यान नहीं दे सकता।

कल रात को मेरठ से दो थाई दोस्‍त मेरी दिनचर्या में खलल डालने आ गए। उनकी सहूलियत के लिये सोम्‍मार्ट सामरोंग के कमरे में सोने चला गया। मैं सुबह के तीन बजे तक कमरे में ही रहा, मगर आँख ही नहीं लगी, इसलिये मैं नीचे अतिथि-लाऊन्ज में सोने के लिये आ गया। वहाँ मुझे बड़ी गहरी नींद आई-मगर सिर्फ चार घंटे। चौकीदार ने आठ बजे मेरा मीठा सपना तोड़ दिया। जैसे ही मैंने बेकार का नाश्‍ता किया मैं वैसे ही, आधी नींद में अपने कमरे में चला गया ताकि कुछ देर और सो सकूँ। मैं बारह बजे खाना खाने के लिये उठा। इसके बाद करीब-करीब पूरा दिन मैं उन दोस्‍तों में ही व्‍यस्‍त रहा। यह व्‍यर्थ है, क्‍योंकि मेरा ज्‍यादातर समय छोटी-छोटी बातों में ही खर्च हो गया। तुमने अपनी जो थीसिस मि० कश्‍यप के लिये छोटी थी उसका मैं कुछ भी न कर सका; वह अभी भी मेरे पास है। मि० अग्रवाल वाला खत भी अभी तक मेरी स्‍टडी-टेबल पर पड़ा है। ये वाकई में समय की बरबादी है।

शाम को चू और ओने अपने चम्‍मच माँगने आए जो उन्‍होंने उस दिन मेरे कमरे में छोड़ दिये थे जब हमने साथ में लंच किया था। वे आए तो मैं नहाने ही जा रहा था। इसके कुछ ही मिनट बाद मुकुल कमरे में आया, हमने कुछ देर बातें कीं और होस्टेल के कैन्‍टीन में स्‍नैक्‍स के लिए चले गए। यह था मेरे बर्बाद-दिन का अन्‍त।

मैं तुम्‍हें बताना ही भूल गया कि मेरी सुबह की नींद में मैंने एक डरावना सपना देखा कि मेरी माँ का निधन हो गया! इतने भयानक सपने को मैं बर्दाश्‍त नहीं कर सकता। मालूम नहीं कि इस सपने का सही-सही मतलब क्‍या होगा। कुछ लोग यह विश्‍वास करते हैं कि सपने में जो दिखे, उसका उल्‍टा परिणाम होता है। इससे मुझे कुछ ढाढ़स बंधा – मतलब ये कि मेरी माँ जिन्‍दा रहेगी। मगर हम ऐसा क्‍यों मानते है? कारण मेरी समझ से परे है। माँ, तुम खूब-खूब जियो! भगवान, मेरी माँ पर दया करना।

ओह, मेरी जिन्‍दगी, मेरा प्‍यार, तुम मेरे पास वापस कब आओगी? क्‍या तुम्‍हें मालूम है कि मुझे तुम्‍हारी याद कितनी सताती है? अब डिनर का वक्‍त हो गया है, इसलिये कुछ देर के लिये तुम्‍हें अलबिदा कहूँगा। आज रात को मैं भगवान से प्रार्थना करुँगा कि तुम अपने माता-पिता के साथ खुशी से रहो और जल्‍दी ही मेरे पास वापस आ जाओ।

अलबिदा, प्‍यारी!

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Charumati Ramdas

I am a retired Associate Prof of Russian. I stay in Hyderabad. Currently keep myself busy with translations of Russian works into HIndi.

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