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दुश्मन मरे ते ख़ुशी ना करिये, ओये सजना ने वी मर जाना

दुश्मन मरे ते ख़ुशी ना करिये, ओये सजना ने वी मर जाना

इस हफ्ते ख़बरों में  सुशांत सिंह का केस ही छाया रहा। मुंबई पुलिस एवं बिहार पुलिस  की खींचतान सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है।  बिहार सरकार की इस केस में दिलचस्पी  आने वाले विधानसभा चुनावों  को लेकर हो सकती है, लेकिन मुंबई पुलिस  के रवैये से लगता है कि शायद किसी को बचाने की कोशिश हो रही है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट इस केस को राजनीती से दूर रखते हुए ऐसा  निर्देश दे कि सुशांत की मौत का सच सामने आ सके। एक शानदार कलाकार की मौत से उनके फैन स्तब्ध हैं। सुशांत की मौत  की गुत्थी जाने कब सुलझेगी , लेकिन एक बात तो तय है कि इस केस ने  बॉलीवुड  की कुछ कड़वी सच्चाइयों को सामने लाना शुरू कर  दिया है।

कोरोना के कारण इस बार स्वतन्त्रता दिवस उतनी धूम धाम से नहीं मनाया गया फिर भी लोगों के  उत्साह में कमी नज़र नहीं आ। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर जिन 87 सैनिकों को  वीरता पुरस्कार दिया गया उनमे प्रमुख हैं 55 आतंकियों को ढेर करने वाले सीआरपीएफ के नरेश कुमार। यह उनका 7वां पदक है। पुलवामा हमले के गुनहगारों को एनकाउंटर में मार गिराने वाले जम्मू कश्मीर पुलिस के कांस्टेबल अब्दुल रशीद कलस को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से नवाजा गया है. इसी एनकाउंटर में घायल हुए डीआईजी अमित कुमार को शौर्य चक्र से नवाजा गया।  देश  की रक्षा के लिए  इन वीर पुरुषों का जितना भी सम्म्मान किया जाये वो कम है।  देश इनका हमेशा कर्जदार रहा  है और रहेग।  प्रधानमंत्री  मोदी जी के लाल किले से सम्बोधन  में कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने वाले कोरोना वारियर्स  को सम्मान देना सुखद लगा।

टीवी न्यूज चैनल पर बहस देखना भी आजकल एक कठिन कार्य हो गया है। कई  बार तो बिना मुद्दे के भी चैनल वाले टाइम पास के लिए मुद्दा ढूंढ लाते हैं और दो तीन पार्टियों के प्रवक्ताओं को बुला  कर  बे सिर पैर कि बहस करा देते हैं। इस बहस से कड़वाहट के अलावा कुछ हासिल नहीं होता।  इस  तरह कि बहस में जब हम जैसे सुनने वाले तनाव में आ जाते हैं तो बहस करने वाले भी निश्चित ही तनाव  में रहते  होंगे।  इसी  तरह की बहस  के कारण  हम ने एक युवा नेता खो दिया। कांग्रेस के तेज-तर्रार प्रवक्ता राजीव त्यागी को एक चैनल  पर भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा  से  हुई एक बहस के तुरंत बाद हार्टअटैक  आया और उनकी  मौत हो गई। इस बहस में हालाँकि  दोनों वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिये ही बात कर रहे थे फिर भी वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिये बात करते हुए तनाव तो उतना ही होता होगा जितना स्टूडियो में बहस करते हुए। राजीव त्यागी जी की मृत्यु पर संबित पात्रा जी  भी शतब्ध थे। जाने क्यों मुझे लगता है कि उनको दिल का दौरा बहस के तनाव की वजह से ही पड़ा होगा।  इन युवा नेता को सच्ची  श्रद्धांजलि यही होगी कि सभी  पार्टियां मिल  कर टीवी चॅनेल पर  चलने वाली बहस  पर कुछ निर्देश लागू करवाएं  ताकि  कुछ सार्थक  बाते  निकल कर आएं ऐसी बहस से और दर्शक भी बहस का आनंद ले सके।

कोरोना वायरस  भारत समेत लगभग पूरी दुनिया के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।  भारत में अब इसका  फैलाव बहुत तेजी से हो रहा है। इस हफ्ते चार लाख से ऊपर केस आ चुके हैं। रोज आने वाले केसों का आंकड़ा 60-65 हज़ार के करीब पहुंच चूका है। राहत की बात यह है कि ठीक होने वालों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है।  रिकवरी रेट  72 प्रतिशत के करीब  पहुंच चूका है। इस हफ्ते भूतपूर्व राष्ट्रपति  प्रणव मुकर्जी भी इस की चपेट में आ चुके हैं , जिनकी हालत गंभीर है। भारतीय टीम के पूर्व  बल्लेबाज चेतन चौहान जिन्होंने  लम्बे समय तक सुनील गावस्कर के साथ भारतीय पारी की शुरुआत की,  उन्हें  भी करोना ने डस लिया और उनके जीवन की  पारी आज खत्म हो गई।  एक दूजे के लिए  फिल्म के मशहूर  गीत, तेरे मेरे बीच में कैसा है यह बंधन अन्जाना… के गायक  बालासुब्रह्मण्यम जी भी इस से पीड़ित हैं और उनकी स्थिति भी गंभीर बनी हुई है।  श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास जी भी कोरोना से  संक्रमित पाये गये हैं। उम्मीद है कि ये सब भी कोरोना  से जंग जीत जायेंगे। कुछ लोग महंत नृत्य गोपालदास जी के कोरोना से पीड़ित होने पर खुश हो रहे हैं। इसी हफ्ते कोरोना  से एक मशहूर शायर राहत इन्दोरी जी का भी निधन हो गया । उनकी  कुछ रचनाओं पर कुछ लोगों में गुस्सा था। मगर जिस तरह से कुछ लोग उनकी मौत के बाद सोसियल मीडिया पे ख़ुशी का इज़हार कर रहे थे उस से दुःख हुआ। ऐसे सज्जनों के लिए ही शायद बहुत पहले सूफी संत मुहम्मद बख्श  यह कलाम लिख गए थे:

दुश्मन मरे ते ख़ुशी ना करिये, ओये सजना ने वी मर जाना

दीगर ते दिन होया  मोहम्मद  कि होड़क  नूं  डूब जाना

 

( दुश्मन के मरने पे खुश नहीं होना चाहिए, क्योंकि अपनों ने भी मरना ही है।  वैसे भी जिंदगी के सूरज  की दोपहर हो चुकी है , कुछ ही देर में में यह भी डूब जायेगा )

लीजिये यह खूबसूरत गीत सुनिए और ऊपर वाले से दुआ कीजिये कि हम व हमारे अपने  कोरोना के प्रकोप से बचे रहें

 

 

 

 

 

 

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Yash Chhabra

Love poetry. Started writing at the starlitecafe . Then moved into Surekha and settled at Facebook.
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Navneet Bakshi
Navneet Bakshi
2 years ago

सब से पहले तो आपका यहाँ स्वागत है यश जी | आपने बहुत ही सरलता से बहुत ही नापा-तुला विश्लेषण किया है सप्ताह भर के टी. वी. पर प्रसारित हुए कार्य-क्रमों का | वैसे तो आज-कल तो काया कहें हिन्दोस्तान में टी.वी. के प्रोग्राम वक्त की बर्बादी के इलावा कुछ नहीं, पर लेकिन अब तो घर बैठे और करें भी क्या ? शायद लोगों को भी बस कुछ ऐसा मसाला ही चैये और अपनी TRP को नज़र-अंदाज़ कैसे करें टी.वी. चैनल वाले, इसलिए वे प्रोग्राम ही ऐसे बनाते हैं | सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के रहस्य की गुत्थी तो वाकई उलझती जा रही है | वैसे देखा जाए तो एक मर्डर को लेकर राज्य-सरकारों का स्टैंड लेना तो फ़िल्मी ही लगता है और ऐसा सिर्फ हमारे देश में ही हो सकता है | टी. वी. पर बहस तो महज़ तमाशा ही हैं. इतना शोर होता है और हर कोई एक-दूसरे की बात काट-रहा होता है इस कदर की कुछ पल्ले नहीं पड़ता |
हाँ शायद रहत इन्दौरी की मौत के बाद उस की निंदा करना उचित नहीं था मगर वह कोई इतना सराहनीय व्यक्तित्व भी नहीं था कि उस की इतनी चर्चा हो | आप ने जिस गीत का ज़िक्र किया है वो आप ने अप-लोड नहीं किया |
बस ऐसी ही दिलचस्प टिप्पणियाँ लिखते रहिए |

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