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जीवन है चलने का नाम

                                                                                         

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव 3 नवंबर, 2020 को होने हैं। इस चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बिडेन से सख्त मुकाबला है। अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय-अमेरिकियों की भूमिका अहम् मानी जा रही है। दोनों उम्मीदवार चुनाव प्रचार के बीच भारतीय मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। ट्रम्प जहां मोदी जी को अपना दोस्त बता कर प्रभावित करने की कोशिश कर रहे है, तो बिडेन ने भी भारतीय मूल की महिला कमला हेरिस का नाम उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित कर अपना दांव चल दिया है। इसी बीच राजनीतिक विश्लेषक टोमी लाहरेन का वीडियो सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन गया है। भारतीय समुदाय को धन्यवाद कहने के लिए जारी इस वीडियो में उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशंसा करते हुए हिंदी में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उल्लू की तरह से बुद्धिमान हैं। उन्हें शायद यह मालूम नहीं होगा कि भारत में उल्लू शब्द को अधिकतर मूर्खों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अति उत्साह में अक्सर गड़बड़ हो जाती है , इस से बचना चाहिए।

हमारे यहाँ बिहार में विधान सभा के चुनाव नवंबर में होने की सम्भावना है। अभी चुनाव आयोग ने तारीखों का एलान नहीं किया है मगर इसी बीच अविनाश ठाकुर नाम के एक सज्जन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की, कि बिहार में कोरोना के बढ़ते केसों को मद्देनज़र रखते हुए चुनाव आयोग से बिहार चुनाव पर रोक लगाने को कहे । इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया. इस याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि “यह प्रीमैच्योर याचिका है. कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है. हम ऐसे में चुनाव आयोग से चुनाव पर रोक लगा देने को कैसे कह सकते हैं?” सवाल यह उठता है कि याचिका दायर करने वाले सज्जन इतनी जल्दी में क्यों थे कि उन्होंने चुनाव आयोग की घोषणा का भी इंतज़ार नहीं किया। वैसे कुछ राजनितिक दल भी चाह रहे हैं की अभी यह चुनाव न हो । कारण चाहे कोरोना ही बता रहे हैं पर लगता है की उन्हें अपनी पार्टी की जीत की सम्भावना कम नज़र आ रही होगी।

कोरोना का बहाना बना कर कुछ लोग NEET और JEE की प्रवेश परीक्षाओं को स्थगित करवाना चाह रहे हैं। इन परीक्षाओं को लेकर देशभर में बहस चल रही है। परीक्षा को लेकर दो गुट बन चुके है। एक वर्ग परीक्षा कराने के पक्ष में है तो दूसरा इसे स्थगित करने की मांग कर रहा है. विपक्षी दल परीक्षा टालने की मांग को लेकर लगातार केंद्र पर निशाना साध रहे हैं. विपक्षी दलों द्वारा शासित 6 राज्य सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं और उन्होंने अदालत से अपील की है कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करे. सुप्रीम कोर्ट NEET और JEE परीक्षा को स्थगित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर चूका है । हैरानगी की बात है की जो पार्टियां कोरोना को बहाना बना कर इस परीक्षा को टालना चाहती हैं , वो अपने राज्यों में बाजार और मंडियां खोलना चाहते हैं। वैसे अधिकतर देखा गया है की संजीदा बच्चे कभी भी किसी भी परीक्षा को टालने के हक़ में नहीं होते , लेकिन वो बच्चे जिन्होंने परीक्षा की तैयारी नहीं की होती वो ऐसे बहानो की तलाश में रहते हैं कि परीक्षा टल जाए। सरकार और विपक्षी दलों को ऐसे मुद्दों पर राजनीति करने से बचना चाहिए और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।

पानीपत के रहने वाले जसमेर सिंह संधू नामक एक सज्जन ने अपने 62वें जन्मदिन के मौके पर 62.4 किलोमीटर की दौड़ लगाईं। उन्होंने दिखा दिया कि कुछ भी करने के लिए उम्र मायने नहीं रखती अगर कुछ मायने रखता है तो वो है आपके अंदर का जज्बा । वो पहले भी दौड़ों में हिस्सा लेते रहते हैं और कई मैराथन दौड चुके हैं। उन्होंने दौड़ने की शुरुआत 2010 से की , जब डॉक्टर ने उन्हें वह दिल की बीमारी होने पर दवाइयां दीं और उनसे तेजी से चलने और सैर करने की सलाह दी ।तब से उन्होंने ने सोच लिया कि अब वह दौड़कर ही अपने दिल को स्वस्थ करेंगे । उनके हौसले को सलाम। फ्लाईंग सिख के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह जी भी कहते हैं कि उन्होंने जिंदगी में कभी दवाई नहीं ली। तबीयत ख़राब होने पर वो ट्रैक सूट पहनते हैं और मैदान में दौड़ लगाने निकल पड़ते हैं

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Yash Chhabra

Love poetry. Started writing at the starlitecafe . Then moved into Surekha and settled at Facebook.
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Navneet Bakshi
Navneet Bakshi
1 year ago

सुना तो है कि अछि सेहत के लिए लम्बी सैर करना बहुत लाभ-प्रद होता है. अब तो वह भी नहीं हो सक रहा है. करोना का बहाना कह लो या कि आलस बस कुछ मन ही नहीं बनाता और अब तो थोड़ा चलना जोखिम ही लगाने लगा है | वैसे NEET और JEE के विरुद्ध लोगों के रुख को ले कर तो हैरानी ही होती है और उन सब इस के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों में राहुल गाँधी भी शामिल है, जिसे पढ़ाई के महत्त्व के बारे में ज्ञान नहीं वह तो इन्हें रोक देने की ही सलाह दे सकता है | पता नहीं क्या सोचते हैं ऐसे लोग कि अगर परीक्षाएं रद्द कर दी जायेंगी तो क्या बच्चों को वैसे ही इंजीनियरिंग कॉलेजस में दाखिला मिल जाएगा? पर सच तो यह है कि इंजीनियरिंग कॉलेज वाले ऐसे लोगों को कॉलेज के आस-पास फटकने भी नहीं देते |
अमेरिकी चुनाव का देखो क्या नतीजा निकलता है | कमला हैर्रिस का तो हिन्दोस्तान से कनेक्शन तो सिर्फ चुनाव का चोंचला ही है और हिन्दोस्तानी मूल के लोग इतने बेवकूफ हैं नहीं, पर वैसे तो ट्रम्प भी कोई हमारा दोस्त नहीं है पर वो कहते हैं न कि A known devil is better than an unknown one.

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